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बहुव्रीहि समास में दोनों पदों के अलावा एक तीसरा अर्थ निकलता है। उदाहरण: दशानन (दस मुँह वाले रावण)।
द्विगु समास में संख्या सूचक शब्द आता है। उदाहरण: त्रिभुज (तीन भुजाओं वाला)।
'नीलकमल' में 'नील' विशेषण है और 'कमल' विशेष्य है। यह कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य) का उदाहरण है।
भाववाच्य में कर्म की प्रधानता नहीं होती। यहाँ भाव या क्रिया की प्रधानता रहती है।
कर्मवाच्य में कर्म को प्रधानता मिलती है और क्रिया कर्म के अनुसार संयुक्त होती है।
अनुप्रास अलंकार में एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति होती है। उदाहरण: कल कलह कोलाहल।
'सूरज निकल आया' में क्रिया अपने आप होती है, किसी कर्ता के प्रयास से नहीं। यह निरर्थक क्रिया है।
हिंदी साहित्य में भक्तिकाल को 15वीं से 18वीं शताब्दी तक माना जाता है।
द्वितीया विभक्ति (को) का मुख्य कार्य क्रिया के कर्म को दर्शाना है।
'लड़ना' एक आत्मनेपदी क्रिया है जो कर्ता के लिए ही होती है।