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विसर्ग संधि में विसर्ग (:) के साथ संधि होती है। 'दुः + ख = दुःख' इसका उदाहरण है।
'सोने जैसा चेहरा' में दो भिन्न वस्तुओं की तुलना 'जैसा' से की गई है, जो उपमा अलंकार है।
श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति या प्रेम होता है।
'वह किताब पढ़ता है' में कर्ता (वह) क्रिया को सीधे करता है, अतः यह कर्तृ वाच्य है।
GPSC परीक्षा में व्याकरण, साहित्य और गुजरात के हिंदी साहित्य को सम्मिलित किया जाता है।
संधि के तीन भेद हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि।
विधेय वाक्य का वह भाग है जिसमें कर्ता के बारे में कुछ कहा जाता है (क्रिया और उसके सभी संबंधी शब्द)।
'राज के द्वारा खत लिखा गया' में कर्म (खत) को प्रधानता है, यह कर्म वाच्य है।
मुहावरा वाक्य का हिस्सा है जैसे 'हाथ धोना', जबकि लोकोक्ति पूर्ण वाक्य है जैसे 'अंधों में काना राजा'।
जयशंकर प्रसाद को छायावाद का प्रमुख कवि माना जाता है, हालांकि सभी विकल्प महत्वपूर्ण हैं।